गुस्से की मूल वजह क्या है? (आचार्य प्रशांत)
पूछा है क्रोध पर कैसे काबू करें? गुस्सा बहुत आता है। गुस्सा इच्छा के न पूरे होने पर आता है। और कोई कारण होता नहीं। आपने कुछ चाहा, आपको मिला नहीं। आप उबल पड़े। जीवन इच्छाओं से जितना संचालित होगा, उतनी संभावना होगी न कि इच्छा पूरी नहीं हो रही है। पचास इच्छाएँ करोगे तो पक्की बात है कि उसमें से तीस तो नहीं ही पूरी होगी। और तीस नहीं पूरी होगी तो फिर कितनी बार गुस्सा आया? तीस बार! गुस्सा तो सिर्फ उस क्षण में आया जब ये प्रकट हो गया कि इच्छा नहीं पूरी हो रही है। और इच्छा पाली कब कब थी? बड़े लंबे समय से। पाल रहे थे इच्छा को, पाल रहे थे, पाल रहे थे... दिनभर इच्छा को पोषण और प्रोत्साहन दिया। और जब इच्छा को प्रोत्साहन दे रहे थे, तब बड़ा अच्छा अच्छा लगता था, क्योंकि इच्छा वादा होती है कि सुख मिलेगा। जब तुम इच्छा को पनपा रहे थे, और फैला रहे थे तब तो ऐसा लगता था, जैसे जन्नत। और लगता जैसे जन्नत तो और इच्छाएँ बुलाई। आ जाओ, तुम भी आओ, तुम भी आओ। और उसके बाद फिर क्या होना शुरु हुआ? नतीजे आने शुरु हुए। पहली इच्छा? रद्द, खारिज। लगे उछलने, दीवार को मार रहे हैं, अपना सर फोड़ रहे हैं, जो भी करते हैं। दूसरी इच्छा?...