रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ अब्तर के कुछ उदाहरण-4
रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ अब्तर के कुछ उदाहरण. 2122 1122 1122 22 (31) मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं مل کے ہوتی تھی کبھی عید بھی دیوالی بھی اب یہ حالت ہے کہ ڈر ڈر کے گلے ملتے ہیں (शायर नामालूम) (32) ठीक है जाओ तअल्लुक़ न रखेंगे हम भी तुम भी वादा करो अब याद नहीं आओगे ! अलीना इतरत ٹھیک ہے جاؤ تعلک نہ رکھینگے ہم بھی تم بھی وعدہ کرو اب یاد نہیں آؤگے (33) उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनों...